रुबी लेजर
रुबी लेजर की संरचना ।
रूबी लेजर में प्रयुक्त रूबी अल्युमिनियम ऑक्साइड होता है,जिसमें से एलुमिनियम के कुछ प्रमाणों को क्रोमियम के परमाणुओं से बदल दिया जाता है।
यह रूबी गुलाबी रंग की बेलनाकर छड़ होती है, जिसका व्यास 0.5 cm से 1cm तक व इसकी लंबाई 5 cm से 10 cm तक होती है, इसकी एक सतह पर चांदी की लेपन कर उसे पूर्ण परावर्तक पृष्ठ बनाते हैं, व दूसरी सतह आंशिक परावर्तक पृष्ठ का कार्य करती है यह छड़ एक सर्पीलाकार क्षणदिप्त लैंप के मध्य रखी जाती है।
जक्षण दीप्ति लैंप से उत्सर्जित प्रकाश रूबी छड़ से टकराती है इसका कुछ भाग हूं बिछड़ के क्रोमियम अनु द्वारा अवशोषित हो जाता है जिससे यह आयन उत्तेजित होकर उच्च उच्च स्तर में चले जाते हैं उत्तेजित अवस्था से कुछ परमाणु स्वत ही उत्सर्जन क्रिया द्वारा मितस्थाई अवस्था में लौट आते हैं।
स्थाई अवस्था से कुछ परमाणु उत्सर्जन क्रिया द्वारा फोटो उत्सर्जित कर मूल अवस्था में लौट आते हैं इस फोटो की तरंगदैर्ध्य 6943 Å होती है जिससे एक शक्तिशाली प्रकाश पुंज का निर्माण होता है।
कार्यविधि ➡
लेजर प्रक्रिया के लिए सक्रिय माध्य में कम से कम तीन ऊर्जा स्तरो का होना आवश्यक है रुबी क्रिस्टल में क्रोमियम परमाणु इस प्रक्रिया को लगातार चलाते हैं एक के ऊपर दो चौड़े बैंड 3A तथा 3B होते हैं 3A ऊर्जा के नीचे एक अन्य विभक्त ऊर्जा स्तर 2 होता है इसमें तो ऊर्जा स्तर होते हैं जिनके मध्य अंतराल 29cm होता है क्रोमियम का आयन निश्चित ऊर्जा का फोटोन अवशोषित कर ऊर्जा स्तरो 3A व 3B में से किसी एक स्तर पर संक्रमण करता है।
इन स्तरों के लिए परमाणु का जीवनकाल लगभग 10–⁸ सेकंड होता है इसलिए उत्तेजित परमाणु बहुत कम समय में ही रूबी के क्रिस्टल को ∆E' ऊर्जा देखकर ऊर्जा स्तर 2 में उतर जाता है यहां परमाणु ज्यादा समय लगभग 10–³ सेकंड तक रहता है यह ज्यादा समय उत्तेजन समय की तुलना में 10⁵ गुना अधिक होता है परमाणु की यह अवस्था में स्थाई अवस्था होती है लगातार संक्रमण मितस्थाई स्तरों में संख्या घनत्व बढ़ता है अंततः यह मूल स्तर में संख्या घनत्व से ज्यादा हो जाता है एवं प्रतिलोमन की अवस्था प्राप्त हो जाती है।
रूबी क्रिस्टल की छड़ पर जिनान गैस विसर्जन नली से क्षणदीप्ति प्रकाश आपतीत कराया जाता है जिससे कुछ क्रोमियम के परमाणु मूल अवस्था में 5600 Å के हरे रंग के प्रकाश के फोटोन अवशोषित कर 3A ऊर्जा स्तर पर पहुंच जाता है दूसरे कुछ क्रोमियम के प्रमाणु 4100Å के फोटोन अवशोषित कर 3B ऊर्जा स्तर पर पहुंच जाते हैं इस प्रक्रिया को प्रकाशिय पंपन कहा जाता है अब 3A व 3B स्तर पर उत्तेजित आयन क्रिस्टल जालक की ऊर्जा ∆E' देकर मितस्थाई ऊर्जा स्तर पर आ जाते हैं ।
इन संक्रमणो से प्रकाश उत्सर्जन नहीं होता मितस्थाई ऊर्जा स्तर का जीवनकाल सामान्य ऊर्जा स्तर से 10⁵ गुना ज्यादा होता है जिससे मितस्थाई स्तर पर परमाणुओं का घनत्व मूल स्तर से अधिक हो जाता है तो उत्सर्जन नगण्य हो जाता है उदीप्ति उत्सर्जन की प्रधानता हो जाती है।
उत्तेजित ऊर्जा स्तर 2 से 1 में संक्रमण करते हैं, =6943 Å तथा = 6929Å के फोटोन उत्तेज्रित होत है।
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